भ्रष्टाचार का किला बनी चौरई तहसील !

दलालों के कब्जे में सिस्टम, बिना “सेवा शुल्क” नहीं सरकती फाइलें

चौरई।

चौरई तहसील अब आम जनता के लिए न्याय का केंद्र कम और भ्रष्टाचार का अड्डा ज्यादा बनती जा रही है। यहां काम नियम-कायदों से नहीं बल्कि “कमीशन” की ताकत से होता दिखाई दे रहा है। अगर आप यह सोचकर तहसील पहुंच रहे हैं कि हाथ में दस्तावेज़ हैं तो काम हो जाएगा, तो शायद आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। यहां फाइलों के पहिए कागजों से नहीं, बल्कि नोटों की गर्मी से घूमते बताए जा रहे हैं।

तहसील परिसर में खुलेआम बिचौलियों का बोलबाला है। गलियारों में घूमते दलाल लोगों से ऐसे सवाल करते नजर आते हैं

—“काम जल्दी करवाना है या अगली पीढ़ी के लिए छोड़ना है?”यह संवाद अब मजाक नहीं बल्कि व्यवस्था की कड़वी सच्चाई बन चुका है।

आरोप हैं कि बिना “सेवा शुल्क” दिए फाइलें महीनों धूल खाती रहती हैं, लेकिन जैसे ही कमीशन पहुंचता है, वही फाइल रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ने लगती है। किसान, मजदूर और गरीब नागरिक अपने ही हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या सुशासन का मतलब अब सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गया है? क्या आम जनता की आवाज ऐसे ही भ्रष्टाचार के शोर में दबती रहेगी?

क्षेत्र की जनता ने माननीय मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि चौरई तहसील में फैले भ्रष्टाचार और दलाल तंत्र की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके और सरकारी दफ्तरों पर जनता का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

अगर आप भी चौरई तहसील की ऐसी व्यवस्था से पीड़ित हैं, भ्रष्टाचार या दलालों के शिकार हुए हैं, तो आगे आएं। अपनी बात कमेंट करें या संपर्क करें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। जनता की आवाज ही बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है।