दो दर्जन मासूमों की मौत के बाद पूरे जिले में जांच… लेकिन चौरई में सन्नाटा! आखिर किसकी छत्रछाया में हैं दवा विक्रेता?
चौरई | स्पेशल रिपोर्ट
छिंदवाड़ा जिला इन दिनों पूरे देशभर की सुर्खियों में है। वजह साफ है — स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, जिसके कारण लगभग दो दर्जन मासूम बच्चों की जान चली गई। मौतों के बाद प्रशासन हरकत में आया, नेताओं का आना-जाना शुरू हुआ और देखते ही देखते छिंदवाड़ा जांच और कार्रवाई का हॉटस्पॉट बन गया।
कई मेडिकल स्टोर्स पर छापे पड़े
दवाओं के नमूने जब्त हुए
कुछ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई भी हुई
लेकिन इसी पूरे ऑपरेशन के बीच चौरई अभी भी अप्रभावित है। न कोई छापा, न कोई नमूना, न कोई पूछताछ!
सवाल जनता का — चौरई पर मेहरबानी क्यों?
जब छिंदवाड़ा, परासिया, सौसर और आसपास के कस्बों तक में मेडिकल प्रतिष्ठानों की बारीकी से जांच की जा रही है, तो चौरई को इस पूरी प्रक्रिया से बाहर क्यों रखा गया?
➡️ क्या चौरई के मेडिकल स्टोर पूरी तरह नियमों के पालन में हैं?
➡️ या फिर यहां किसी अदृश्य शक्ति की ‘छत्रछाया’ में कारोबार चल रहा है?
➡️ अगर सब कुछ सही है — तो जांच से घबराहट कैसी?
जनता की मांग — “खुली जांच हो, रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए!”
स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से साफ कहा है —
“अगर चौरई में सब पारदर्शी है तो ऑन-कैमरा जांच करवाई जाए। और अगर गड़बड़ी है — तो कार्रवाई में देरी क्यों?”
✅ TV20 भारतवर्ष की अपील:
“न्याय तभी पूरा होगा जब जांच ‘सिलेक्टिव’ नहीं बल्कि ‘सभी पर समान रूप से’ हो!”
अगर आप भी इस सवाल से सहमत हैं तो नीचे अपना कमेंट जरूर लिखें
“चौरई में भी जांच हो!”






