चौरई (छिंदवाड़ा) — तहसील चौरई में एक ऐसा सिस्टम घोटाला सामने आया है, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक को लूट का हथियार बना दिया गया। मामला मोरखा स्थित खसरा क्रमांक 64/3 का है, जहां गुनबती बाई पिता भूरा ने पहले पटवारी से सांठगांठ कर फर्जी नामांतरण कराया, फिर इसी कागज़ी जमीन को गिरवी रखकर पंजाब नेशनल बैंक, चौरई शाखा से मोटा लोन पास करा लिया।
जब सच उजागर हुआ…
एसडीएम (राजस्व) ने जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ लिया और खसरे में संशोधन आदेश जारी कर दिया।
अब न जमीन असली है, न मालिक—
और बैंक के करोड़ों फंस चुके हैं!
सबसे बड़ा सवाल: अब यह लोन भरेगा कौन?
बैंक की ‘सर्च रिपोर्ट’ या ‘कमिशन रिपोर्ट’?
हर लोन से पहले बैंक को जमीन और मालिक की जांच करनी होती है, पर यहां हुआ उल्टा—
जमीन का वेरिफिकेशन ZERO
मालिक की पहचान ZERO
कागजों पर बस मोहर लगी… और जेब में कमीशन चला गया!
सूत्रों का दावा है—बैंक के अफसर और आउटसोर्स कर्मचारी मिलकर महीनों से ऐसे फर्जी लोन पास कर रहे थे।
ये सिर्फ एक केस नहीं—पूरी लूट की फैक्ट्री है!
दर्जनों फर्जी लोन का खेल
आउटसोर्स कर्मचारी की सीधी मिलीभगत
अफसरों की जेब में कमीशन
वसूली का कोई पता नहीं
जनता का गुस्सा, जनता के सवाल
- बैंक की सर्च रिपोर्ट में आखिर क्या देखा गया?
- फर्जी नामांतरण को बैंक ने कैसे मान्यता दे दी?
- क्या बैंक और पटवारी की ये साझेदारी एक संगठित अपराध नहीं है?




