सावन के अंतिम सोमवार को निकली गजराज सवारी, चौरई बना शिवमय नगरी
चौरई, जिला छिंदवाड़ा | TV20 भारतवर्ष विशेष रिपोर्ट
श्रावण मास की शिवभक्ति ने इस बार चौरई नगर को महाकाल के रंग में रंग दिया। महाकाल उत्सव समिति, चौरई के तत्वावधान में पूरे सावन मास में चार सोमवारों पर आयोजित हुए आयोजनों ने नगर को भक्ति, सेवा और श्रद्धा से सराबोर कर दिया।
पूरे श्रावण मास में हुए प्रमुख आयोजन इस प्रकार रहे –
🔹 14 जुलाई – प्रथम सवारी (पैदल शोभायात्रा):
उत्सव की शुरुआत प्रथम सोमवार को महाकाल की पैदल शोभायात्रा से हुई। बैंड बाजों और हर-हर महादेव के गगनभेदी नारों के बीच श्रद्धालुओं ने नगर भ्रमण किया। रात्रि यात्रा में भक्तों की सहभागिता ने ये सिद्ध किया कि श्रद्धा किसी साधन की मोहताज नहीं।
🔹 21 जुलाई – द्वितीय सवारी:
दूसरे सोमवार को सजीव झांकियों, भक्ति गीतों, डीजे धुनों और पारंपरिक रथ सज्जा के साथ महाकाल की शोभायात्रा निकाली गई। नगर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला।
🔹 28 जुलाई – नगर भोज:
संपूर्ण नगर के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भोजन व्यवस्था, पानी वितरण, साफ-सफाई से लेकर वरिष्ठ नागरिकों की सेवा तक, समिति का कार्य अनुकरणीय रहा।
🔹 4 अगस्त – गजराज सवारी और अंतिम शोभायात्रा:
सावन के अंतिम सोमवार को रात्रि 9 बजे महाकाल की गजराज सवारी निकाली गई। महाकाल की भव्य झांकी गजराज पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकली, जिसे देखने हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। ढोल, ताशे, भक्ति नृत्य और शिव तांडव के साथ नगर शिवमय हो उठा।

आयोजन की रीढ़ बनी – महाकाल उत्सव समिति, चौरई
इस महोत्सव को सफल बनाने में महाकाल उत्सव समिति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। समर्पण, सेवा और संकल्प के साथ समिति ने कार्यक्रमों की श्रृंखला को सुनियोजित ढंग से संपन्न किया।
📣 TV20 भारतवर्ष की खास अपील:
जो भक्त इस आयोजन का हिस्सा नहीं बन पाए, वे अगले वर्ष इस अद्भुत भक्ति उत्सव में जरूर शामिल हों।
यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, एक आत्मिक अनुभव है – एक आध्यात्मिक यात्रा!
🕉️ हर हर महादेव | जय श्री महाकाल 🕉️






