तेंदुओं के शिकारी गिरोह पर STF का बड़ा वार, दिल्ली से 9वां आरोपी गिरफ्तार

वाइल्डलाइफ SOS में काम करता था आरोपी वसीम अकरम, तेंदुओं के अवैध शिकार और तस्करी के नेटवर्क की खुल रही परतें

भोपाल। मध्यप्रदेश में तेंदुओं के अवैध शिकार और उनकी खाल की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को बड़ी सफलता मिली है। संगठित गिरोह के 9वें आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान वसीम अकरम, पिता नसीम अहमद, निवासी उत्तम नगर, नई दिल्ली के रूप में हुई है। खास बात यह है कि आरोपी के Wildlife SOS में कार्यरत होने की जानकारी सामने आई है।

मामले की शुरुआत 23 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के आगरा में 10 तेंदुओं की खाल के साथ तस्करों की गिरफ्तारी से हुई थी। पूछताछ और जांच के दौरान यह मामला महज खाल की तस्करी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेंदुओं के संगठित शिकार और तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने लगा।

7 शिकारियों की गिरफ्तारी, जंगलों से मिले अवशेष

मामले में मध्यप्रदेश STSF और स्थानीय वन अमले की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7 शिकारियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों की निशानदेही पर श्योपुर और मुरैना जिलों से बड़ी मात्रा में तेंदुओं के अवशेष एवं कंकाल बरामद किए गए। जांच में आरोपियों द्वारा कुल 10 तेंदुओं के शिकार की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच में सामने आया कि शिकार के लिए इस्तेमाल किए गए 3 लेग होल्ड ट्रैप भी जब्त किए गए हैं। तेंदुओं का शिकार क्षेत्र चीता लैंडस्केप में शामिल होने के कारण मामले को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

दिल्ली तक पहुंचा शिकंजा

वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मध्यप्रदेश STSF और केंद्र सरकार के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), नई दिल्ली की संयुक्त टीम लगातार आरोपियों तक पहुंच रही है। इसी कड़ी में 11 अगस्त को नई दिल्ली से एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी और लगातार तलाश के बीच 13 अगस्त को वसीम अकरम को भी दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया।

STSF की कार्रवाई के बाद अब गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों के अनुसार मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान लगातार जारी है।

वन्यजीव अपराध पर बड़ा प्रहार

तेंदुओं के शिकार, उनके अवशेषों की बरामदगी और तस्करी के इस मामले ने वन्यजीव अपराध के संगठित नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। STF की लगातार कार्रवाई से गिरोह की कड़ियां एक-एक कर सामने आ रही हैं। फिलहाल मामले में विवेचना जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।