12 जुलाई 2025 | TV20 भारतवर्ष न्यूज दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (BJP) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर मंथन अपने अंतिम दौर में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के BRICS सम्मेलन से लौटने के बाद पार्टी अगले अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक चुनाव की औपचारिकता लगभग पूरी हो चुकी है, और अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम तय करने की प्रक्रिया RSS के मार्गदर्शन में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
इस बीच एक नाम चौंकाने वाला लेकिन चर्चित रूप से सामने आ रहा है — संजय विनायक जोशी।
कौन हैं संजय विनायक जोशी?
संजय जोशी भाजपा के एक वरिष्ठ और जमीनी नेता माने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय संगठन मंत्री के रूप में 2001 से 2005 तक पार्टी को नई दिशा दी थी। खासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड जैसे राज्यों में चुनावी सफलता में उनका संगठन कौशल उल्लेखनीय रहा।
संजय जोशी RSS के प्रचारक रह चुके हैं और उन्हें एक अनुशासित, ज़मीन से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता है। वे गुजरात भाजपा के निर्माण के प्रमुख स्तंभों में शामिल रहे और नरेंद्र मोदी के साथ भी आरंभिक दौर में संगठन में मिलकर काम कर चुके हैं।
क्यों बढ़ रही है चर्चा?
हाल ही में पीएम मोदी का RSS मुख्यालय नागपुर दौरा हुआ, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज़ हो गईं कि संजय जोशी की भाजपा में वापसी संभव है। कई कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच यह भावनात्मक मांग रही है कि पार्टी को एक बार फिर जोशी जैसे “संगठनात्मक योद्धा” की ज़रूरत है।
हालाँकि भाजपा नेतृत्व की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जोशी समर्थक गुटों के बीच यह विश्वास है कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए एक “सरप्राइज़ कैंडिडेट” बन सकते हैं।
अन्य संभावित नाम कौन-कौन?
भाजपा अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की व्यापक चर्चा है, उनमें शामिल हैं:
भूपेन्द्र यादव – OBC चेहरा और चुनाव प्रबंधन में पारंगत
धर्मेन्द्र प्रधान – पूर्वी भारत का प्रतिनिधित्व और केंद्रीय मंत्री
प्रह्लाद जोशी – दक्षिण भारत में मजबूत पकड़ और RSS से जुड़ाव
निर्मला सीतारमण – महिला नेतृत्व का प्रभावी चेहरा
वनाथी श्रीनिवासन – युवा और दक्षिण भारत की लोकप्रिय नेता
इन सभी नामों के बीच संजय जोशी का नाम एक “आश्चर्यकारी लेकिन तगड़ा संगठनात्मक दावेदार” माना जा रहा है।
क्या संजय जोशी की वापसी होगी?
BJP में फिलहाल मोदी-शाह युग का दबदबा है। ऐसे में जोशी की वापसी आसान नहीं मानी जाती, लेकिन अगर RSS नेतृत्व और वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी सहमति जताएं, तो उनका नाम चर्चा से निकलकर मंच तक भी पहुंच सकता है।
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