छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जुन्नारदेव जनपद पंचायत कार्यालय में हुए ध्वजारोहण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सविता अशोक भोसम ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) पर निर्धारित प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अध्यक्ष ने मामले को लेकर जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अध्यक्ष के पहुंचने से पहले ध्वजारोहण का आरोप
अध्यक्ष की शिकायत के मुताबिक, 15 अगस्त को जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में सुबह 8 बजे से 8:30 बजे के बीच ध्वजारोहण का कार्यक्रम निर्धारित था। शिकायत में कहा गया है कि कार्यक्रम के दौरान जनपद पंचायत उपाध्यक्ष भी मौके पर मौजूद थीं और अध्यक्ष के भी निर्धारित समय पर पहुंचने की बात कही गई थी।

अध्यक्ष का आरोप है कि उनके कार्यालय परिसर में पहुंचने से करीब दो मिनट पहले ही CEO द्वारा ध्वजारोहण करा दिया गया। अध्यक्ष ने इसे प्रशासनिक प्रोटोकॉल की अनदेखी बताते हुए कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए था।
प्रोटोकॉल उल्लंघन का लगाया आरोप
शिकायत में मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों का हवाला दिया गया है। अध्यक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर जनपद पंचायत कार्यालय में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कार्यक्रम कराया जाना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर उन्हें ध्वजारोहण से वंचित किया गया, जिससे निर्वाचित जनप्रतिनिधि के अधिकार और पद की गरिमा प्रभावित हुई है।
कलेक्टर से तीन प्रमुख मांगें
अध्यक्ष ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, प्रोटोकॉल की कथित अवहेलना के लिए संबंधित CEO के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने तथा भविष्य में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकार और सम्मान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
अध्यक्ष ने घटना को निर्वाचित आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि की उपेक्षा और पद की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
CEO का पक्ष आना बाकी
इस पूरे मामले में अध्यक्ष की ओर से CEO पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, शिकायत के संबंध में CEO का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और ध्वजारोहण के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।




