चौरई। नगर के श्री तारण तरण जैन चैत्यालय में चल रहे पावन चातुर्मास के अंतर्गत सोमवार को आयोजित धर्मसभा में अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्डर, भारत रत्न काशी महामना, बाल ब्रह्मचारी दशम प्रतिमा धारी श्रद्धेय आत्मानंद जी महाराज ने धर्म की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “प्राणी मात्र की वास्तविक प्रतिष्ठा धर्म को धारण करने में है। धर्म ही आत्मा की ज्योति, चैतन्य का प्रकाश और शाश्वत सत्य का मार्ग है।”
महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि धर्म रूपी महासागर को धारण करने वाला जीव भवसागर की लंबी यात्रा से मुक्त होकर परम शाश्वत सत्य की प्राप्ति करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, ज्ञान और आत्मचिंतन को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
प्रवचन के दौरान महाराज श्री ने तारण तरण मंडलाचार्य जी महाराज द्वारा रचित 14 ग्रंथ रत्नों की 49 दिवसीय वाचना एवं श्री छदमस्त वाणी के अध्ययन को आत्मकल्याण का श्रेष्ठ माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस ज्ञानरूपी अमृत को अपने जीवन में धारण करेगा, वही स्वयं दूसरों के लिए भी तारणहार बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक जीव अपने भीतर स्थित चिदानंद स्वरूप परमात्मा को पहचानने का प्रयास करे। यही सच्चे धर्म और मोक्ष का मार्ग है।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा जैन ने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में धर्मसभा में पहुंचकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया। वहीं जैन समाज अध्यक्ष संजय सुकांत ने भी समाजजनों से ज्ञान और धर्म की ज्योति को अपने जीवन में आत्मसात करने की अपील की।
कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार सौरभ जैन ने भी अपने संदेश में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी ज्ञानमयी चैतन्य ज्योति को जागृत कर परमात्मा से जुड़ने का प्रयास करे। चौरई में चल रहे इस पावन चातुर्मास में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।






