छिंदवाड़ा।
फर्जी पत्र कांड की कहानी अब एक नए मोड़ पर पहुँच चुकी है। पत्रों में लिखा गया था –
“विधायकों को तोड़कर भाजपा में लाओ… बदले में 50-50 करोड़ रुपये और मंत्रीपद मिलेगा।”
ये कोई साधारण बयान नहीं था — यह पूरी व्यवस्था को हिला देने वाला खुलासा था।
लेकिन इसके बावजूद जनता को सिर्फ इतना बताया गया कि “पत्र का दुरुपयोग हुआ है।” असली बातें छुपाई गईं।
👉 क्या सत्ता के कुछ बड़े चेहरे इस सौदे से जुड़े थे?
👉 क्या इसलिए असली पत्र सामने नहीं आने दिया गया?
👉 और क्या इस खेल में छिंदवाड़ा समेत पूरे छत्तीसगढ़ के कई नाम शामिल हो सकते हैं?
राजनीतिक गलियारों में हलचल है —
“अगर ये सच सामने आया तो और भी बड़े नाम उजागर होंगे…”
👉 कल का खुलासा: आखिर किसके इशारे पर इस खेल में एक संत का नाम घसीटा गया?






