छिंदवाड़ा।
वर्ष 2019 – छत्तीसगढ़ की राजनीति में अचानक एक ऐसा तूफान उठा, जिसने सत्ता के गलियारों को हिला कर रख दिया।
राज्यपाल के नाम से फर्जी पत्र बने, भारी भरकम सौदे लिखे गए और सत्ता पलटने का षड्यंत्र रचा गया।
👉 ये पत्र कभी गंतव्य तक पहुँचे ही नहीं। डाकघर से लौट आए।
👉 रिपोर्ट दर्ज हुई।
👉 मीडिया में सिर्फ इतना कहा गया – “पत्र का दुरुपयोग हुआ है।”
लेकिन असली सच… आज तक दबाया गया।
🔴 सबसे बड़ा सवाल यह है – उन पत्रों में आखिर लिखा क्या था, जिसे जनता से छुपाया गया?
🔴 और क्यों इस पूरे खेल में एक संत का नाम घसीटा गया?
🔴 क्या इस खेल के पीछे कुछ ऐसे चेहरे थे, जो आज भी सत्ता के इर्द-गिर्द सक्रिय हैं?
राजनीतिक गलियारों में आज भी ये सवाल दबे स्वर में पूछे जाते हैं –
“अगर उस पत्र की असलियत पूरी तरह उजागर हो गई, तो क्या कई बड़े नाम सामने आ जाएंगे?”
👉 कल का खुलासा: उन पत्रों में लिखा क्या था… और क्यों सत्ता ने उस हिस्से को जनता से छुपाया?






