चौरई। शासकीय महाविद्यालय चौरई में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत “वसुधैव कुटुंबकम्” विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया।
पुस्तकालय प्रबंधक श्री लक्ष्मीकांत डेहरवाल ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम् भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। भारत ही ऐसा देश है जो सदैव विश्व कल्याण की बात करता है।
समाज शास्त्र प्राध्यापक डॉ. रामकुमार उसरेठे ने विद्यार्थियों को बताया कि चाहे कोरोना महामारी में वैक्सीन उपलब्ध कराना हो या आपदाओं में दवाओं की सहायता देना—भारत हमेशा विश्व परिवार के साथ खड़ा रहा है।
नोडल अधिकारी डॉ. विकास शर्मा ने कहा कि जब हम पूरी पृथ्वी को परिवार मानते हैं, तब हमारी जिम्मेदारियां केवल देश तक सीमित नहीं रहतीं। पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और भाईचारे का संदेश देना भी हमारा दायित्व है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का उदाहरण देते हुए युवाओं से भारत को “विश्व गुरु” बनाने का आह्वान किया।
महाविद्यालय प्राचार्य श्री मुकेश कुमार ठाकुर ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत सदियों से प्रकृति और विकास के संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता आया है। आज पूरी दुनिया भारतीय दर्शन के आधार पर विश्व शांति की उम्मीद लगाए बैठी है और इस दिशा में युवा शक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।






