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महाकुंभ 2025: श्री दिगम्बर अखाड़ा में बनाए गए 10 नए महामंडलेश्वर, सौंपी गई अहम जिम्मेदारी,
महाकुंभ 2025: दिगम्बर अखाड़ा की ओर से 10 नए महामंडलेश्वर बनाए गए जिसमें ऋषिकेश किशनगढ़ राजस्थान महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, वृंदावन के प्रमुख संत भी शामिल हैं।
प्रयागराज: महाकुंभ 2025, 144 वर्षों के बाद पूर्ण महाकुंभ के रूप में गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर आयोजित किया जा रहा है। अब तक लगभग 15 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। इस आयोजन में सनातन धर्म से जुड़े प्रमुख अखाड़े, जो सेक्टर 5 में स्थित हैं, श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। साधु-संतों के दर्शन के लिए प्रतिदिन लाखों भक्त पहुंच रहे हैं। दिगम्बर अखाड़ा ने अपने दस संतों को महामंडलेश्वर जैसे बड़े पद की जिम्मेदारी सौंपी है।

जिसमें सबसे प्रमुख जिम्मेदारी छिंदवाड़ा जिले के युवा संत, जिले के गौरव छिंदवाड़ा की शान श्री क्षेत्र रामटेक खालसा के पीठाधीश्वर शारदा धाम घोघरी के महंत स्वामी अजय रामदास (भैयाजी)
महाराज को दी गई है।
साथ ही श्री राम तपस्थल आश्रम ब्रह्मपुरी ऋषिकेश उत्तराखंड एवं श्रीकोटी वाले बालाजी सरकार ब्रह्मपुरी जिला श्योपुर मध्य प्रदेश के व्यवस्थापक भी स्वामी अजय रामदास भैयाजी महाराज है।

144 वर्ष बाद आए प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 27 जनवरी त्रयोदशी तिथि पर सुप्रीम कोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए गवाही देने वाले करोड़ों करोड़ों हिन्दू हृदय सम्राट जगदगुरू रामानंदाचार्य पद्म विभूषण स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के एवं श्री श्री १००८महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास जी के कृपा पात्र शिष्य अजय रामदास (भैयाजी) महाराज को दिगम्बर अखाड़े का श्री श्री १००८महामंडलेश्वर बनाया गया ।
स्वामी अजय रामदास जी का छिन्दवाड़ा जिला वासियों को महामंडलेश्वर प्राप्त होना छिंदवाड़ा जिले के लिए सौभाग्य ही नहीं बल्कि गौरव की बात है।
गंगा,यमुना ,सरस्वती त्रिवेणी के जल,दूध, घी, शहद, दही, शक्कर से बने पंचामृत से महामंडलेश्वर का पट्टाभिषेक किया गया ,महामंडलेश्वर को अखाड़े की तरफ से चादर , छत्र, दंड भेंट की गई। 13 अखाड़ों के संत, महंत ,साधु समाज के लोगों ने पट्टा पहनाकर किया स्वागत।

क्या होते है महामंडलेश्वर
हिंदू धर्म में महामंडलेश्वर पद ही शंकराचार्य के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक पद माना जाता है। अखाड़ों का मुख्य पद यानी महामंडलेश्वर का पद प्राप्त करने में वर्षों लग जाते हैं।
महामंडलेश्वर के पद पर उसी संन्यासी , त्यागी, वैष्णव को आसीन किया जाता है जो अखाड़े में शिक्षा, ज्ञान, सामाजिक स्तर और संस्कार आदि में सर्वोच्च हो। देश के चार शहरों में लगने वाले महाकुंभ और अर्धकुंभ में महामंडलेश्वर का गौरव देखते ही बनता है।

कुंभ और महाकुंभ में शाही स्नान के दिन महामंडलेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर राजा की तरह पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं। नागा साधुओं का सैलाब उनकी सुरक्षा में साथ चलता है और उनके अनुयायी उनकी जय-जयकार करते हैं।

महामंडलेश्वर समाज को मार्गदर्शन देने का कार्य करता है और जब किसी धर्मिक समुदाय को कोई समस्या या विवाद होता है, तो उनका निर्णय अंतिम होता है. अखाड़ों में महामंडलेश्वर का पद प्रभावशाली होता है. छत्र-चंवर लगाकर चांदी के सिंहासन पर आसीन होकर महामंडलेश्वर की सवारी निकलती है. महामंडलेश्वर का जीवन त्याग से परिपूर्ण होता है
ज्ञात हो कि जगदगुरू रामानंदाचार्य पद्म विभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य अजय रामदास छिंदवाड़ा जिले चौरई क्षेत्र के ग्राम घोघरी, कुंडा में जन्मे हैं।